झूठी सरकार झूठी खबरें
जैसा की पिछले 70 सालों में देखा गया है। आजादी के बाद कांग्रेस ने देश को संवारने का काम पंडित नेहरू , लाल बहादुर शास्त्री, इंद्रा गांधी ने शिक्षा, स्वस्थ बिजली, पानी सरकारी नौकरी, जैसी मूल भूत सुविधाओं पर काम किया।
आज जब बीजेपी की सरकार है लोगो का ये कहना है कि चोरों के बाद डकैतों का राज देखने को मिला है।
मोदी देश का पहला ऐसा प्रधानमंत्री है जो बेशर्मी के साथ झूठ बोलने में माहिर है। देश की चाटुकार मडिया गुणगान में व्यस्त है।
मोदी जी लोकतंत्र को लूटने में कांग्रेस से चार आगे निकल गए है।
वोट चोरी: लोकतंत्र की हत्या!
भारत जैसे महान लोकतंत्र की नींव जनता के वोट पर टिकी है। लेकिन जब यही वोट चोरी हो जाते हैं, तो यह केवल जनता के साथ विश्वासघात नहीं बल्कि लोकतंत्र की हत्या है।
वोट चोरी किनके लिए?
वोट चोरी वही करता है जिसे जनता का भरोसा नहीं है।
जो दल जनता के बीच काम नहीं करते, वही फर्जी वोटिंग कराते हैं।
जिन नेताओं की नीतियाँ असफल होती हैं, वही बूथ कैप्चरिंग और गड़बड़ी का सहारा लेते हैं।
जिन्हें अपनी हार साफ दिखाई देती है, वही मशीनों से छेड़छाड़ की साजिश रचते हैं।
लोकतंत्र पर सबसे बड़ा हमला
वोट चोरी करने वाले दरअसल जनता की आवाज़ दबाते हैं। यह केवल एक सीट जीतने का खेल नहीं, बल्कि लोकतंत्र की आत्मा को कुचलने की साजिश है। यह सवाल सिर्फ़ विपक्ष या सत्ताधारी का नहीं, बल्कि हर जागरूक नागरिक का है — अगर वोट चोरी होगी तो जनता की आवाज़ कौन सुनेगा?
जनता को सतर्क रहना होगा
अब समय आ गया है कि जनता अपनी ताक़त पहचानें।
हर बूथ पर जनता की चौकसी हो।
अगर फर्जी वोटिंग दिखे, तो उसे बेनकाब किया जाए।
लोकतंत्र के चोरों को सामाजिक रूप से भी बेनकाब करना ज़रूरी है।
चुनाव आयोग से सवाल
चुनाव आयोग को कठोर कदम उठाने होंगे। जनता पूछ रही है:
कब तक फर्जी वोटिंग सहन की जाएगी?
कब तक बूथ कैप्चरिंग के बाद कार्रवाई टलती रहेगी?
कब तक आम मतदाता अपने नाम गायब होने की मार झेलेगा?
निष्कर्ष
आज ज़रूरत है कि हर नागरिक एक सुर में कहे —
"वोट चोरी नहीं चलेगी, लोकतंत्र की लूट बंद होनी चाहिए!"
अगर वोट चोरी पर लगाम नहीं लगी, तो यह लोकतंत्र केवल किताबों में बचेगा, जमीन पर नहीं। जनता के वोट का सम्मान ही लोकतंत्र की असली जीत है और जो भी ताक़तें इस सम्मान को छीनने की कोशिश करेंगी, उन्हें जनता जवाब देगी।
वोट चोर को डर लग रहा है ।
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